मंगलवार, 1 जुलाई 2008

ओळ्यूँ

थारी ओळ्यूँ घणी आवै म्हारा धोराँवाळा देस
धोराँवाला देस प्यारा मरुधर देस
बै अन-धन स्यूँ भर्या आँगणाँ, भींत मड्या चितराम
पोळी-पोळी इमरत बरणो, हेत झरै सुखधाम
म्हारा.....
दूध, चूंटियो, छाछ, राबड़ी, बै बाट्यां बा दाळ
घी डूबी बाजर री रोट्यां, ब कांसी रा थाळ
म्हारा.....
सांगर, खींपोळी’र, खेलरा, फळी, फोफळ्या साग
देळी आवै भोग लगावै, देव सरावै भाग
म्हारा.....
नैण बस्या बै टीबा ऊँचा, चिलकै सोनल रेत
काचर, बोर, मतीरा मीठा, हर्या-भर्या बै खेत
म्हारा.....
रोई रो सिणगार खींप जाट्यां झाड़्या अर फोग
खोखो मेवो मरुभोम रो, कह्वै बडेरा लोग
म्हारा.....
गळै बाजती घण्ट्या प्यारी, फिरै गोधुळी ढोर
लीलटॉस, कुरजा, कम्मेड़ी, छतरी ताण्यां मोर
म्हारा.....
बै पणघट, बै कुआ-बावड़ी, बै सारण बा लाव
बै जोड़ा, जोड़ाँ री बुंगल्याँ, बै ढाण्याँ बै गाँव
म्हारा.....
तीज-त्यूंहाराँ गळ्याँ-गळ्याँ गूंजै मनभावण गीत
मेळ-खेळ फळै घणेरी, अपणायत री रीत
म्हारा.....
जैपर, जोधाणो, बीकाणो, आबू, गढ़ आमेर
कीरत खामो खङ्यो चितौड़ाँ, हांगो सांगानेर
म्हारा.....
लोहागर, पुश्कर, कोलायत, गळताजी सिरमोर
सालासर हड़मान बिराजै, गणपत रणथम्भोर
म्हारा.....
रुणीचै रो रामदेवरो, झुँझणू दादी धाम
डूंगरवाळी जीवण माता, खाटू बाबो ष्याम
म्हारा.....
जागण, जुम्मा देव सिमरणा, धन-धन माणस जूण
फड़ बांचै जद भोपा-भोपी हो आणद सौ गूण
म्हारा.....
जीं माटी रो कण-कण गावै, सूर सत्यां रा गान
रावण हत्थै, अळगोजाँ री, गूंजै हिवड़ै तान
म्हारा.....
नर-नाहर सांगा राणाजी, कुंम्भा, दुर्गादास
लोही आखर लेख लिख्या बै, ख्यातां करी उजास
म्हारा.....
पन्ना धाई बेटो सूंपै, हाड़ी सीस भिजावै
धन पदमण धन जौहर ज्वाला, माटी मान बधावै
म्हारा.....
जोत प्रेम री रामू-चनणा, मूमल मधरा गान
भगती मेड़तणी मीरां री, भामा सा रो दान
म्हारा.....
गुरु वसिश्ठ जिण धरती तपिया, सुरसत दीन्यो ज्ञान
बीं मरुधरियै रै सत बळ रो, आभै उड़ै निसान
म्हारा.....
पताः 66, पथरिया घाट स्ट्रीट, कोलकाता-700006 मोबाइल:0-9433272705

1 टिप्पणी:

Unknown ने कहा…

कांई लिखू समझ आवे कोणी
आपरी इण रचना ने म्हारो मन मोह लियो।
इरा जीता वखाण करूँ उत्ता कम हे।
जय जय म्हारे धोरां वाला देश री।
मुकेश दुदावत

प्रकाशक के बारे में

मेरी फ़ोटो
बिहार के कटिहार में जन्म, साहित्य जगत में किसी का नाम स्वतः नहीं होता, उसे कुछ लिखना ही होगा, भले ही लेख, कहानी या कविता हो, शम्भु चौधरी ने कई लघुकथाऎं/कविता/सामाजिक लेख लिखें हैं। इनका जीवन सामाजिक कार्यों में ही गुजर गया, वर्तमान में आप कोलकाता से प्रकाशित 'समाज विकास' पत्रिका के कार्यकारी सम्पादक हैं और इस वेव पत्रिका 'नया समाज' के सम्पादक। आपकी एक पुस्तक "मारवाड़ी देस का न परदेस का" विभिन्न सामाजिक मुद्दों पर लिखे इनके लेखों का संग्रह प्रकाशित।